Call For The Planning Meeting For Kolkata Rainbow Pride Walk, 2016

Come! Let’s “pride”!
In a world gone mad, we can make a little sense.
Although the visibility of the LGBTQ+ people has increased somewhat over recent years, not much progress has been made in terms of equality and rights. Ever since the 2013 re-criminalisation of same-sex relationship between two consenting adults in private, things have seemed darker for people with alternative gender and sexual identities. The recent badly thought out transgender protection bill, is another such example. The curative petition for 377 remains referred to a five judge bench, with no fixed date for the hearing in sight.
This is going on in the backdrop of a general atmosphere of hate, intolerance, and increasing fanaticism, in India and abroad. All the more reason then, to make our presence felt, and to celebrate our differences.
Come join us for the first of the Planning meetings for the Kolkata Rainbow Pride Walk-2016! Come to Nandan at 5pm on 16th Octopber, Sunday, to get the ball rolling!
আসুন! গর্বের সাথে হাঁটি!
এই উন্মাদ দুনিয়ায় একটু শান্তি আর বিবেচনার জায়গা বানাই।
যদিও সাম্প্রতিক কিছু বছরে এল.জি.বি.টি.কিউ+ মানুষদের সমাজে একটা ভিসিবিলিটি এসেছে, এমন মানুষ যে হয়, আশেপাশেই আছে সেটা সাধারণ মানুষ বুঝতে শিখেছে, কিন্তু সমতা আর অধিকারের লড়াই সেই অনুপাতে এগোয়নি। ২০১৩ তে যখন দুজন প্রাপ্তবয়স্ক মানুষের সম্মতিতে, তাদের নিভৃত যৌনক্রিয়া-কে আবারো নতুন করে “অপরাধমূলক” বলে আখ্যা দেওয়া হলো, তখন থেকেই যেন এই পরিস্থিতি আরো কালো, আরো থমথমে হতে শুরু করেছে। সম্প্রতি আসা একটি আধখেঁচড়া “ট্রান্সজেন্ডার প্রোটেকশন বিল” এরই আরো একটি নমুনা। ধারা ৩৭৭ এর কিউরেটিভ পিটিশন ও ৫-বিচারপতির বেঞ্চের কাছে পাঠানো হয়ে সেভাবেই পড়ে আছে, তার শুনানির দিন ঠিক হওয়ার কোনো আশা এখনো দেখা যাচ্ছেনা।
আর লিঙ্গ বা যৌনতার দিক দিয়ে প্রান্তিক মানুষদের এইসব পরিস্থিতি চলছে বৃহত্তর এক হিংসা, অসহিষ্ণুতা, ধর্মান্ধতার এক প্রেক্ষাপটের ওপরে — শুধু দেশেই নয়, বিদেশেও। এই তো তাহলে সঠিক সময় — আমাদের উপস্থিতি দেখানোর আর আমাদের আমাদের পার্থক্য, আমাদের বিচিত্র ও বিবিধ পরিচয়গুলিকে আনন্দের সাথে তুলে ধরার!
আসুন, আমরা ২০১৬-র কোলকাতা রেইনবো প্রাইড ওয়াক-এর প্রস্তুতি নিই। ১৬ই অক্টোবর, রবিবার, আসুন আমরা বিকেল ৫ টায় নন্দন প্রাঙ্গনে জমায়েত হয়ে আমাদের উৎসবের সূচনা করি!
आइये, गर्व से चलें!
इस पागलपन से भरी दुनिया में एक छोटी सी दुनिया बनायें, समझदारी और समावेश की!
पिछले कुछ सालों में समाज में एल.जी.बी.टी.क्यू+ लोगों की उपस्थिति कुछ हद तक पहचानी गयी है। लोग समझने लगे हैं कि ऐसे लोग होते हैं, और उनके आस पास ही होते हैं मगर, क्या इस हिसाब से समानता और अधिकारों की लड़ाई आगे बढ़ पाई है? जब २०१३ में एकांत में दो बालिग लोगों के बीच में, परस्पर सहमति से हुआ समलैंगिक यौन आचरण फिर से कानूनन अपराध करार दिया गया, तब ही से जैसे लिंग और यौनता (यौन आचरण) के अधिकारों की लड़ाई पर अँधेरा छा गया है। हाल ही में आया आधा-अधूरा, बेढंगा “ट्रांसजेंडर प्रोटेक्शन बिल” भी इसी का एक उदहारण है।  धारा ३७७ के कियूरेटिव पेटिशन का भी कुछ ऐसा ही हाल है। ५ जजों की बेंच को भेज तो दिया गया है… मगर सुनवाई की तारीख मिलने के कोई अासार नज़र नहीं आते।
 ये सब चल रहा है ऐसे वक्त में जहाँ देश विदेश में पहले ही बढ़ती हुई हिंसा, असहिष्णुता, और धार्मिक कट्टरता का माहौल छाया हुआ है। यही वक्त है हमारी उपस्थिति और हमारी विविधता का जश्न मानने का।
आइये २०१६ के कोलकाता रेनबो प्राइड वॉक  करें! १६ अक्टूबर, रविवार को शाम के ५ बजे नंदन में मिल कर इस साल के हमारे “अपने” उत्सव का आग़ाज़ करें!
With Warm Regards,
Kolkata Rainbow Pride Festival.
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